Sand Artist Madhurendra Kumar: Difference between revisions

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Revision as of 15:08, 27 July 2026


मधुरेंद्र कुमार बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले के निवासी, विश्व प्रसिद्ध भारतीय रेत कलाकार (Sand Artist), मूर्तिकार, चित्रकार, लीफ आर्टिस्ट एवं बहु-माध्यम (Multi-Media) कलाकार हैं। उन्होंने अपनी मौलिक सोच, तकनीकी दक्षता और सामाजिक सरोकारों से प्रेरित रचनात्मक कार्यों के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और बिहार का नाम रोशन किया है।

स्थलरुद्ध (Landlocked) राज्य बिहार में नदी तटों की बालू को कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाकर उन्होंने सैंड आर्ट को लोकप्रिय बनाया। उन्होंने 25 से अधिक देशों में 50 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय सैंड आर्ट फेस्टिवल्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। 12 से अधिक विश्व रिकॉर्ड्स दर्ज कराने वाले मधुरेंद्र कुमार भारत निर्वाचन आयोग, स्वच्छ सर्वेक्षण तथा बिहार सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के ब्रांड एंबेसडर व स्टार प्रचारक रहे हैं।

प्रारंभिक जीवन एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि

मधुरेंद्र कुमार का जन्म 5 सितम्बर 1994 को बिहार की राजधानी पटना से 182 किमी दूर पूर्वी चम्पारण जिले के घोड़ासहन प्रखंड के बरवाकला गाँव (ननिहाल) में एक अत्यंत साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर कानू (हलवाई) परिवार में हुआ। उनका पैतृक गाँव भारत-नेपाल सीमा पर अरुणा नदी के तट पर स्थित बीजबनी (प्रखंड बनकटवा, पूर्वी चंपारण) है।

  • पिता: श्री शिवकुमार साह (साधारण गरीब किसान)
  • माता: श्रीमती गेना देवी (गृहिणी, क्षेत्रीय लोकगीत गायिका, सिक्की कला व ऊनी बुनाई में दक्ष)
  • दादा-दादी: स्व. रामचंद्र साह (स्थानीय मेलों में झाल-मूढ़ी व मिठाइयाँ विक्रेता) एवं स्व. फूला देवी

पारिवारिक संघर्ष: किशोरावस्था में कला के प्रति अनन्य समर्पण के कारण उन्हें प्रारंभिक वर्षों में पारिवारिक असहमति का सामना करना पड़ा, क्योंकि परिजन कृषि या सरकारी नौकरी चाहते थे। घर से अलग रहकर उन्होंने विभिन्न प्रकार के श्रम एवं छोटे-मोटे कार्य करते हुए आजीविका चलाई और निरंतर कला साधना जारी रखी।

शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता

औपचारिक शिक्षा

  • प्रारंभिक शिक्षा: सरकारी मिडिल स्कूल, ग्राम बीजबनी, पूर्वी चंपारण।
  • माध्यमिक (मैट्रिक): गांधी उच्च विद्यालय, भेलावा सर्किल, पूर्वी चम्पारण (BSEB, 2009) — द्वितीय श्रेणी (54.2%)।
  • उच्चतर माध्यमिक (10+2): जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल कॉलेज (J.L.N.M. College), घोड़ासहन (BSEB, 2009-11) — प्रथम श्रेणी (66.2%)।
  • कला स्नातक (B.A. - Hindi): J.L.N.M. College, घोड़ासहन (बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, 2013-16) — द्वितीय श्रेणी (54%)।
  • बी.एफ.ए. (BFA In Sculpture): महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ (MGKVU), वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
  • एम.एफ.ए. (MFA In Sculpture): महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ (MGKVU), वाराणसी, उत्तर प्रदेश।

ललित कला एवं चित्रकला योग्यता (प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़)

  • आई.एफ.ए. (IFA In Painting / चित्रा भूषण - 3rd Year): महिला कला प्रशिक्षण केंद्र, मोतिहारी (2011-14) — प्रथम श्रेणी (61.5%)।
  • बी.एफ.ए. (BFA In Painting / चित्रा विशारद - 5th Year): महिला कला प्रशिक्षण केंद्र, मोतिहारी (2014-17) — प्रथम श्रेणी (78.6%)।
  • एम.एफ.ए. (MFA In Painting / चित्रा भास्कर - 7th Year): आरती कल्याण सेवा संस्थान, पटना (2021-22) — प्रथम श्रेणी (67%)।
  • इंटरमीडिएट ग्रेड ड्राइंग परीक्षा: महाराष्ट्र सरकार ड्राइंग ग्रेड परीक्षा (2022-23) — GRADE 'A' Award

तकनीकी कौशल एवं व्यावसायिक प्रमाण-पत्र

  • ADCA (एडवांस्ड डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन): New Friends Commercial Institute, Patna (2011) — Grade 'A' (60%)।
  • भू-मापक (अमीन) प्रशिक्षण: ATEP Welfare Society, ब्लॉक कैंपस, घोड़ासहन (2012) — प्रथम श्रेणी (78%)।
  • ऑल इंडिया कराटे ट्रेनिंग: Shito Ryu Seiko Kai Karate Do-India, नई दिल्ली (2013) — Brown Belt

मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate)

  • मानद पीएच.डी. (2026): अमेरिका इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (AIU), हॉलीवुड, कैलिफोर्निया (USA) द्वारा रेत कला (Sand Art) के क्षेत्र में उनके असाधारण एवं वैश्विक योगदान हेतु *Honorary Doctor of Philosophy in Sand Art* की उपाधि से सम्मानित।

विश्व एवं राष्ट्रीय रिकॉर्ड

  • Supreme World Record Title (2012): बठिंडा (पंजाब, 2005) में राष्ट्रीय एकता पर 45 फीट ऊँची व 100 फीट लंबी रेत मूर्ति (200 टन रेत, 50 मजदूर, 15 दिन)। यह विश्व रिकॉर्ड का गौरव पाने वाला दुनिया का पहला सैंड स्कल्पचर बना।
  • United States Global Merit Record (2014): पटना गंगा दियारा काइट फेस्टिवल में पर्यावरण संरक्षण हेतु "सेव डॉल्फ़िन" (20 फीट ऊँची, 50 मीटर लंबी) विशाल सैंड स्कल्पचर।
  • Prestigious Book of World Record (2019): 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान चंपारण में 35 फीट ऊँची व 55 फीट लंबी दुनिया की सबसे बड़ी वोटर अवेयरनेस रेत आकृति।
  • Orient Book of World Record (2022): छठ पर्व पर पटना मरीन ड्राइव पर सात घोड़ों पर सवार भगवान सूर्य की 38 फीट ऊँची व 55 फीट लंबी रेत कलाकृति।
  • Asian Book of World Record (2022): सोनपुर मेले में पौराणिक 'गज-ग्राह युद्ध' पर 40 फीट ऊँची व 60 फीट लंबी रेत प्रतिमा।
  • European Book of World Record (2023): बोधगया (फाल्गु तट) में शांति व अहिंसा का संदेश देती 42 फीट ऊँची व 80 फीट लंबी बुद्ध की विशाल रेत मूर्ति।
  • National Book of Record Feature (2023): प्रभात पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक *"बिहार की महान हस्तियाँ"* (लेखक: ललित कुमार) में पृष्ठ 190 (क्रम 17) पर जीवन व कला शामिल।
  • London Book of World Records (2025): 5,000 से अधिक संदेशात्मक रेत कलाकृतियों के निर्माण हेतु; ब्रिटिश संसद (लंदन) में सम्मानित।
  • Asian Book of World Record (2025): सोनपुर मेले में 'गज-ग्राह युद्ध' पर आधारित भगवान विष्णु की 50 अद्वितीय रेत प्रतिमाओं का निर्माण।
  • UN Book of World Records (2026): भगवान बुद्ध के जीवन चक्र पर 26 वर्षों में 50 अलग-अलग रेत प्रतिमाओं के निर्माण हेतु यूनाइटेड नेशंस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा सम्मानित।
  • USA Book of World Records (2026): 21,000 से अधिक पत्ता कलाकृतियों (Leaf Art) के माध्यम से समाज में संदेश प्रसार हेतु (विश्व के प्रथम लीफ आर्टिस्ट रिकॉर्ड)।
  • Forbes Book of World Records (2026): बिहार के सभी जिलों में सरकारी नीतियों व अभियानों (2005-2025) पर 100+ रेत कलाकृतियाँ बनाकर जन-जागरूकता फैलाने हेतु फोर्ब्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज।

ब्रांड एंबेसडर एवं राजकीय अभियान

  • लोकसभा चुनाव ब्रांड एंबेसडर (2019): भारत निर्वाचन आयोग एवं दैनिक भास्कर द्वारा मतदाता जागरूकता हेतु।
  • बिहार विधानसभा चुनाव ब्रांड एंबेसडर (2020): निर्वाचन आयोग, भारत सरकार द्वारा राज्य स्तरीय व ढाका विधानसभा क्षेत्र हेतु नियुक्त।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण ब्रांड एंबेसडर (2021-22): भारत सरकार के 'स्वच्छ शहर-स्वच्छ गांव' अभियान हेतु।
  • सुधा डेयरी (COMFED) ब्रांड एंबेसडर (2024): राष्ट्रीय किसान मेला में दुग्ध उत्पादक किसानों के प्रोत्साहन हेतु।
  • बिहार सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के स्टार प्रचारक (2005–2025):
    • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा संचालित अभियानों (न्याय यात्रा, विकास यात्रा, समाधान यात्रा, निश्चय यात्रा, प्रगति व समृद्धि यात्रा) का प्रचार।
    • 'सात निश्चय-1, 2 व 3', जल-जीवन-हरियाली, पूर्ण शराबबंदी, दहेज प्रथा उन्मूलन, बाल विवाह निषेध, पर्यावरण संरक्षण व हर घर गंगा जल परियोजना का कलात्मक संदेश।

अंतर्राष्ट्रीय सम्मान, पुरस्कार एवं प्रतिनिधित्व

मधुरेंद्र कुमार ने 25 से अधिक देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, जिनमें प्रमुख उपलब्धियाँ निम्न हैं:

  • एशिया व मध्य पूर्व: नेपाल (इंडो-नेपाल गोल्ड अवार्ड, गढ़ीमाई सम्मान), म्यांमार (सैंड पैगोडा फेस्टिवल 2013), भूटान (गोल्ड सैंड आर्ट अवार्ड 2014, बेस्ट सैंड स्कल्पचर आर्टिस्ट 2025), सिंगापुर (2016), जापान (टोटोरी सैंड फेस्टिवल 2016, 2018, 2019, 2021), मलेशिया (2017), दक्षिण कोरिया (बुसान सैंड अवार्ड 2019), ओमान (मस्कट महोत्सव 2024), श्रीलंका (2020), तुर्की (2025)।
  • यूरोप व रूस: फ्रांस (2014), जर्मनी (USF वर्ल्ड चैम्पियनशिप ख़िताब बर्लिन 2018, 2019, 2024, 2025), यूनाइटेड किंगडम (ग्लासगो 2015, ब्रिटिश संसद सम्मान 2025), डेनमार्क (2017, 2023), मॉस्को/रूस (वर्ल्ड सैंड आर्ट चैम्पियनशिप 2018, 2019, 2023), नीदरलैंड्स (2018, 2022), इटली (2018), बेल्जियम (2021), स्पेन (2023)।
  • अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया: फ्रेंडशिप रिलेशन ऑफ इंडिया एंड अमेरिका पुरस्कार (2013), सोलो सैंड स्कल्पचर चैम्पियनशिप (USA 2025), मेलबर्न सैंड स्कल्प्टिंग (ऑस्ट्रेलिया 2024)।
  • राष्ट्रीय सम्मान: 100 से भी अधिक राष्ट्रीय पुरुष्कार प्राप्त हुए हैं जिनमे से कुछ मुख्य पुरुष्कार इस प्रकार हैं : डॉ. कलाम युवा रत्न सम्मान (कोलकाता 2024), अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन कला प्रदर्शनी स्वर्ण पदक (2020, 2021), वैश्विक गांधी शांति सम्मेलन सम्मान (2019), ओडिशा अंतर्राष्ट्रीय रेत कला उत्सव सम्मान (8वें से 13वें संस्करण तक)।

कला की तकनीक, सिद्धांत, विषय एवं माध्यम

कला का सिद्धांत एवं माध्यम

मधुरेंद्र कुमार की कला का मूल सिद्धांत "कला समाज के लिए" है। वे केवल सौंदर्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन को प्राथमिकता देते हैं।

  • मूर्तिकला माध्यम: रेत (Sand), मिट्टी (Clay), कोयले की राख (छायी), सीमेंट, फाइबर, प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), मोम (Wax), तांबा, पीतल, एल्युमिनियम, मार्बल व ग्रेनाइट।
  • सूक्ष्म कला (Micro Carving): हरी पत्तियों पर नक्काशी (Leaf Carving), फल एवं सब्जियों पर नक्काशी (Fruit & Veg Carving), अनाज के दाने, थर्मोकोल, प्लाईवुड।
  • पुनर्चक्रण (Recycling/Upcycling) आधारित कला: खाली शराब की बोतलें, पाउच, गुटखा/तंबाकू के रैपर, सिगरेट के अवशेष व सनफिक्स से कलाकृतियां बनाकर नशामुक्ति व स्वच्छता का संदेश देना।

प्रमुख विषय-वस्तु

  • सामाजिक जागरूकता: पर्यावरण संरक्षण, जल-जीवन-हरियाली, प्लास्टिक प्रतिबंध, नशामुक्ति, सड़क सुरक्षा, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला सशक्तिकरण, बाल श्रम उन्मूलन।
  • राष्ट्रीय व ऐतिहासिक व्यक्तित्व: महात्मा गांधी, सरदार पटेल, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, डॉ. बी.आर. आंबेडकर, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम नीतीश कुमार।
  • धार्मिक व सांस्कृतिक: भगवान बुद्ध, भगवान विष्णु अवतार, भगवान शिव, माँ दुर्गा, गज-ग्राह युद्ध, भारतीय शास्त्रीय नृत्य व विरासत।

बिहार में सैंड आर्ट का विकास एवं योगदान

बिहार जैसे स्थलरुद्ध (Landlocked) राज्य में, जहाँ समुद्री तट उपलब्ध नहीं हैं, मधुरेंद्र कुमार ने नदी तटों (अरुणा, गंगा, गंडक, कोसी, सोन) की बालू को अपना मुख्य माध्यम बनाया।

  • प्रारंभिक घटना (1998): वर्ष 1998 में पूर्वी चंपारण में आई भीषण बाढ़ के समय 4 वर्ष की आयु में उन्होंने अरुणा नदी के तट पर वर्षा रोकने हेतु भगवान इंद्र की बालू प्रतिमा बनाई, जिसे उनकी कला-यात्रा की शुरुआत माना जाता है।
  • ऐतिहासिक मील के पत्थर: वर्ष 2005 में पंजाब के भटिंडा में राष्ट्रीय एकता पर विशाल सैंड आर्ट से राष्ट्रीय पहचान मिली। इसके बाद 2012 में बिहार दिवस के अवसर पर पटना गांधी मैदान में "महिला सशक्तिकरण" पर सैंड आर्ट का प्रदर्शन कर राज्य में इस विधा की नींव रखी।

संस्थागत पहल: मधुरेंद्र की कला एवं शिल्प अनुसंधान संस्थान

कला के क्षेत्र में अपने व्यक्तिगत संघर्षों से प्रेरित होकर मधुरेंद्र कुमार ने वर्ष 2004 में "मधुरेंद्र की कला एवं शिल्प अनुसंधान संस्थान" की स्थापना की।

  • मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण एवं निर्धन पृष्ठभूमि के प्रतिभावान बच्चों को निःशुल्क कला प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • प्रशिक्षण क्षेत्र: सैंड आर्ट, लीफ आर्ट, मूर्तिकला, चित्रकला, सिक्की व मूंज कला (मौनी/दऊरी निर्माण), बांस-बेंत शिल्प, दीवार चित्रण व हस्तशिल्प।
  • गुरुकुल परंपरा: संस्थान पारंपरिक लोक कलाओं के संरक्षण और युवाओं के लिए कला-आधारित स्वरोजगार के अवसर सृजित करने हेतु कार्यरत है।

व्यक्तिगत विवरण

  • नाम: डॉ. मधुरेंद्र कुमार
  • जन्म: 5 सितम्बर 1994 (बरवाकला, घोड़ासहन, पूर्वी चंपारण, बिहार)
  • पैतृक निवास: ग्राम बीजबनी, प्रखंड बनकटवा, पूर्वी चंपारण, बिहार
  • पिता: श्री शिवकुमार साह
  • माता: श्रीमती गेना देवी
  • पत्नी: श्रीमती दीपिका कुमारी
  • संतान: २ बच्चे